पाकिस्तान के कराची में क्लिफ़टन इलाक़े में स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई है और कम से कम एक व्यक्ति घायल हो गया है.
एक पाकिस्तानी टेलीविजन चैनल ने कहा है कि एक हमलावर की भी मौत हुई है. पुलिस का कहना है कि चीनी राजनयिक सुरक्षित हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार शुक्रवार की सुबह चीन के वाणिज्य दूतावास पर हमलावरों ने धमाका किया और उसके बाद फ़ायरिंग शुरू कर दी. वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की.
लेकिन सोशल मीडिया पर हमले की तस्वीरें और वीडियो देखे जा सकते हैं. तस्वीरों में इमारतों से धुआं उठता हुआ दिख रहा है. कहा जा रहा है कि बंदूकधारी चीन के वाणिज्य दूतावास में घुसने की फिराक में हैं.
वाणिज्य दूतावास की तरफ़ जाने वाले सभी रास्तों पर नाकेबंदी कर दी गई है.
कराची से बीबीसी संवाददाता रियाज़ सुहैल के अनुसार सिंध के पुलिस महानिरीक्षक ने इस बारे में रिपोर्ट मांगी है.
पाकिस्तान ने हालाँकि अभी तक इस हमले के बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है.
अलगाववादी संगठन बलोच लिबरेशन आर्मी ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है. संगठन के प्रवक्ता ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि इस हमले में उनके तीन साथी शामिल हैं और ये हमला चीन को सबक सिखाने के मकसद से किया गया है.
विधानसभा को इस उम्मीद में निलंबित रखा गया था कि शायद नई सरकार की संभावनाएं बनें. बुधवार को पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने संकेत दिया कि वे मिलकर सरकार बनाने के लिए तैयार हैं. फॉर्मूला ये था कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस महबूबा मुफ्ती को सरकार बनाने के लिए समर्थन देंगी.
जब महबूबा का ख़त जम्मू (सर्दियों में जम्मू-कश्मीर की राजधानी) स्थित राजभवन पहुँचा तो राजनीतिक गतिविधियों में अचानक से तेज़ी आ गई. एक घंटे बाद ही राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए विधानसभा को भंग कर दिया. अभी इस विधानसभा का कार्यकाल दो साल से अधिक बचा हुआ था.
अब राज्यपाल की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. मीडिया में इस बात पर चर्चा हो रही है कि गवर्नर के इस क़दम से कैसे जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र कमज़ोर हुआ. सवाल और बहस अपनी जगह बरकरार हैं, लेकिन यहाँ ये समझना अधिक ज़रूरी है कि विधानसभा भंग करने का फ़ैसला इतनी जल्दी क्यों ले लिया गया, और तब क्यों नहीं जब कांग्रेस, पीडीडी और नेशनल कॉन्फ्रेंस पिछले चार महीनों से यही राग अलाप रही थीं.
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